पढो तो ऐसे पढो

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डॉ विजय अग्रवाल

Book Description

एक सच्चे सुख की खोज में स्वयं यथार्थी-करण प्राप्त करना चाहिए। मानव मन अनंत संभावनाओं से भरा है। यह संभावनाएं तभी यथार्थ मैं परिवर्तित हो सकेंगी जब हममे पारंपरिक तरीकों से परे कदम रखने की सोच आएगी और हमारे मस्तिष्क का अभी तक अप्रयुक्त, शायद यह भी की निष्क्रिय हिस्सा उसका लाभ उठाने की क्षमता रख सकेगा। यह पुस्तक एक नया और वैकल्पिक दृष्टिकोण प्रदान करती है। यह पुस्तक एक ऐसा परिप्रेक्ष्य और तकनीक प्रदान करती है जिससे पाठकों को अपने मस्तिष्क को उत्तेजित करने में मदद मिलेगी और बेहतर समझ हासिल करने की क्षमता प्राप्त होगी कि कैसे हमारी सोच कार्य करती है। और यह किताब यह भी कहती है कि, कोई भी यह कर सकता है! यह छात्रों के लिए एक जबरदस्त किताब है जो उनकी कथित सीमा क्या है और उससे परे उत्कृष्टता प्राप्त कैसे करना हैं यह बतलाती है।